Tuesday, 27 February, 2007

चिठ्ठा जगत के यक्ष प्रश्न

अब हिंदी चिठ्ठा जगत के पांच (कईयों के मामले में और भी ज्यादा) यक्ष प्रश्नों से कोई चिठ्ठाकार नहीं बच सका, यहां तक कि बड़े बड़े नामी और वरिष्ठ चिठ्ठाकार भी इसकी चपेट में आ गये तो मुझ जैसी नई चिठ्ठाकार की बिसात ही क्या? टैगियाने का यह बढ़ता हुआ छूत का रोग सबको गिरफ्त में लेता हुआ मेरे दरवाजे भी आ खड़ा हुआ। पहले नीलिमा जी ने अपने वाद-संवाद में टैग कर के बताया कि मुजरिम हाजिर है और फिर डॉन ने अपने गुर्गो में हमारा नाम देकर गैंगवार में नाम शामिल कर एनकाउंटर का खतरा बढ़ा दिया है। डॉन को तो पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है, लेकिन उसको गुर्गे तो पकड़े क्या एनकाउंटर में खलास भी हो जाते हैं। तो एनकाउंटर से बचने के लिये जरूरी है कि जल्द से जल्द नीलिमा जी और डॉन के प्रश्नों के उत्तर दिये जायें।

पहले मुजरिम बनने के कारण पूछे गये प्रश्न

प्रश्न : आपकी चिट्ठाकारी का भविष्य क्या है?

  • मेरे विचार में मेरे द्वारा की गई हिंदी चिठ्ठाकारी का भविष्य बहुत ही उज्जवल है, हालांकि यह बात अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने वाली बात होगी परन्तु मेरा विचार तो यही है, क्योंकि हालांकि हिंदी चिठ्ठाकारी में नई ही हूं, फिर भी शुरुआत के दिनों और अबके दौर में बहुत फर्क आ गया है। आप सभी लोगों कि टिप्पणियां मेरे जैसे लोगों के लिये प्रोत्साहन का कार्य करती हैं, और अब आप सब के साथ मिल कर चिठ्ठाकारी करने में हिचक नहीं रही। अब जब भी कोई नई ज्ञानवर्धक जानकारी प्राप्त होती है तो बस उसे सब लोगों के साथ बांटने बैठ जाती हूं। अब तो यह आलम है कि कहीं कोई समाचार, कोई आलेख, कोई घटना देख मन में यह ख्याल आता है कि अगर इसके ऊपर ब्लॉग पोस्ट बनाई जाये तो कैसा रहे? आप लोग भी अपनी टिप्पणियों द्वारा खूब प्रोत्साहित करते हैं तो आगे भी हिम्मत कर पाती हूं। हिंदी में लिखने के शुरूआता दौर में यही नहीम समझ में आता था कि क्या लिखूं? इसीलिये शुरुआती दौर में इधर-उधर से देखे शेर और दिल्ली की हमारा बदनाम ब्लू लाइन बसों में चिपके हुये ड्राइवरों के सड़कछाप शेर-डॉयलॉग इत्यादि लिख कर देखा कि हिंदी लिख भी सकते हैं कि नहीं। पर शुरुआती दिनों कि झिझक तो अब खैर नहीं रही बल्कि अब तो लगता है कि हिंदी चिठ्ठा जगत तो एक परिवार की तरह है । इसलिये मैं मानती हूं कि यदि हिंदी चिठ्ठा ग्रुप इसी तरह कार्यरत रहा तो हिंदी चिठ्ठाकारी का भविष्य बहुत ही उज्जवल रहेगा और अन्य नये लोग भी इन चिठ्ठों को पढ़कर प्रोत्साहित होंगे।

प्रश्न : आपके पसंदीदा टिप्पणीकार?

  • सारे ही लोग टिप्पणी करके प्रोत्साहित करते हैं तो किसी विशेष का नाम लेना उचित नहीं होगा।

प्रश्न : तीसरा सवाल वही है जो प्रत्यक्षा जी का तीसरा सवाल था यानि किसी एक चिट्ठाकार से उसकी कौन सी अंतरंग बात जानना चाहेंगे ?

  • दरअसल बात ये है कि आप सब लोग इस बात से परिचित होंगे कि हमारे किस्से कहानियों में और खास तौर से हिंदी फिल्मों में अक्सर दिखाया जाता है कि किसी प्रसिद्ध कहानीकार या शायर को चाहने वाली कई लड़कियां होती हैं, जो कई बार तो खाली शायर के नाम से ही प्यार करने लगती हैं। तो मैं अपने हिंदी जगत के प्रसिद्ध और पुराने या जो लोग आजकल जीत रहे हैं, उनसे पूछना चाहूंगी कि क्या उनकी कोई गुमनाम प्रशंसिकायें है जो कि चिठ्ठों पर टिप्पणी न करके सीधे ई-मेल भेजती हों?
  • प्रश्न : वह बहुत मामूली बात जो आपको बहुत परेशान किए देती है?
    • मेरे अपने जब किसी भी कारणवश परेशान होते हैं तो मैं बहुत ज्यादा परेशान हो जाती हूँ। उस समय लगता है कि कोई जादू की छड़ी होती सब सही कर देती, पर ऐसा कहां मुमकिन है। मेरे बच्चे, पति, रिश्तेदार, अड़ोस-पड़ोस इत्यादि में जब कोई परेशान होता है तो मैं परेशान हो जाती हूँ। यानी यदि कोई दूसरा परेशान होता है तो मैं भी परेशान हो जाती हूँ।
  • प्रश्न : आपकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत झूठ?
    • यूँ तो मैं भगवान की कृपा से झूठ नहीं बोलती हूँ। लेकिन ये भी नहीं मैं आजकल के जमाने में सत्यवादी हरिश्चंद्र हूँ। एक बार मजाक में बोला गया झूठ काफी मजेदार है। हुआ यूँ कि मैंनें अपनी बिटिया के लिये एक नई ड्रेस खरीदी थी। उसने जब उस ड्रेस को पहना तो वो बड़ी खुश हुई और मेरे से बार-बार पूछने लगी कि कहां से खरीदा है। टालने की गरज से और मजाक में मैंने कह दिया कि भीख में लाये हैं। उसने अड़ोस-पड़ोस सब जगह खुशी-खुशी बता दिया कि मेरी मम्मी ये ड्रेस भीख में लाई हैं। यह बात याद करके आज भी हंसी आ जाती है।

    और अब सीबीआई के वो प्रश्न जिनका जबाव देकर मैं क्वात्रोची की तरह बच जाउंगी।

    प्रश्न : हिन्दी चिट्ठाकारी ही क्यों?

    • हिंदी चिठ्ठाकारी इसलिये क्योंकि मैं हिंदी भाषी हूँ, हिंदी में ही सोचती हूँ और हिंदी की तरक्की चाहती हूँ।

    2.प्रश्न : जीवन में कब सबसे अधिक खुश हुए?

    • अपनी शादी पर। क्यों? कभी किसी पोस्ट में बताउंगी।

    3. प्रश्न : अगला जन्म मिले तो क्या नहीं बनना चाहोगे?

    • अ-भारतीय

    4. प्रश्न :कौन सा चिट्ठा सबसे अधिक पसन्द है, क्यों?

    • अपना (हिंदीबात).. हा. हा... (श्रीशजी की तरह - रावण वाली हंसी) , सभी अच्छे चिठ्टे हैं , किसी एक का नाम पूछकर गैगवार छिड़ने का खतरा है और मेरा एनकाउंटर पक्का है।

    5. प्रश्न : हिन्दी चिट्ठाजगत के प्रचार प्रसार में क्या योगदान दे सकते हैं?

    • अभी तो फिलहाल हिंदी चिठ्ठाकारी के माध्यम से ही कुछ सेवा हो सकती है, बाकि जैसा आदेश हिन्दी चिट्ठाजगत के 'भाई' लोगों का हो।

    मेरा ख्यांल है कि सभी चिठ्ठाकारों को टैगियाया जा चुका है इसलिये किसी को टैग नही करं रही हूँ। अगर कोई हैं, तो वो खुद को शिकार समझें और इन्हीं प्रश्नों का उत्तर दें।

    Friday, 23 February, 2007

    आदिवासियों का वेलेंटाइन डे भगोरिया

    पश्चिम मध्य प्रदेश के आदिवासी जनजातीय युवक युवतियों काBhagoria festival of Indian Tribals  by hindibaat.blogspot.com वेलेंटाइन डे (प्रणय पर्व) भगोरिया 25 फरवरी को शुरू हो रहा है। आदिवासी अंचल झाबुआ और खारगौन जिलों में परंपरागत रूप से मनाए जाने वाले इस रंगीन पर्व में स्थालीय भील और भीलाला लोगों के युवक और युवतियां बड़े उत्साह के साथ शामिल होते हैं। इस मेले के प्रति विदेशियों में भी खासा आकर्षण है। भारत भ्रमण के दौरान वे भगोरिया मेलों में बड़ी तादाद में शामिल होते हैं। भगोरिया हाट में आने वाले आदिवासी युवक-युवती एक दूसरे को पसंद करने के बाद भागकर विवाह कर लेते हैं। इस भाग जाने की वजह से ही इसको भगोरिया कहते हैं। परंपरा के अनुसार अगर किसी लड़के को कोई लड़की पसंद आ जाती है तो वो उस लड़की के गालों पर गुलाल लगाकर अपनी चाहत का इजहार कर देता है। अगर लड़की को भी लड़का पसंद होता है तो वो भी लड़के को गुलाल लगा देती है। इसके बाद ये लोग वहां से भाग जाते हैं। इसके बाद आदिवासी समाज इनको पति-पत्नि का दर्जा दे देता है।

    इस भगोरिया को फसल पकने और होली की खुशी का भी प्रतीक माना जाता है। साल भर अलग-अलग स्थानों पर काम धंधा करने वाले आदिवासी भगोरिया पर्व पर अपने अपने घरों पर लौट आते हैं और गिले शिकवे भुलाकर मौज मस्ती के साथ इस पर्व को मनाते हैं। यह पर्व होली से पहले मनाया जाता है। बदलते जमाने के साथ भगोरिया पर भी आधुनिक संस्कृति का प्रभाव पड़ा है। आदिवासियों के पहनावे में बदलाव आया है तथा वाद्य यंत्रों ढोल और मृदंग का स्थान इलेक्ट्रानिक्स उपकरणों ने ले लिया है। झाबुआ के साथ ही धार और खरगोन जिलों में भी 25 फरवरी से होली दहन (तीन मार्च) तक भगोरिया पर्व मनाया जाएगा। झाबुआ जिले के 45 गांवों में भगोरिया हाट लगेंगे।

    कड़ियां:

    बेटे के साथ परीक्षा दे रहे हैं विधायक

    चाईबासा : ऐसा बहुत कम सुनने में आता है कि बेटे के साथ बाप भी परीक्षा दे रहा है। झारखंड के विधायक सुखराम उरांव अभी तक मैट्रिक पास नहीं थे। इस वर्ष अपने बेटे के साथ वह भी परीक्षा में शामिल हुए हैं। उनका बेटा सन्नी उरांव भी चक्रधरपुर के एक विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा दे रहा है। सुखराम उरांव जब से विधायक बने हैं, अपने पिता के नाम से स्थापित ट्रस्ट लट्टू उरांव स्मारक समिति के बैनर तले हर साल समारोह आयोजित कर मैट्रिक की परीक्षा में टाप करने वालों को सम्मानित करते रहे हैं। सम्मान में मोटरसाइकिल व कंप्यूटर देते हैं, लेकिन एक बात उन्हें हमेशा कचोटती रही कि वह स्वयं मैट्रिक पास नहीं है। लिहाजा उन्होंने बिना किसी संकोच के मैट्रिक परीक्षा का फार्म भर दिया। यह बात किसी को पता नहीं थी। उन्हें परीक्षा देते देखा गया तो उन्होंने साफ कहा कि जो काम पहले नहीं कर पाया, उसे अब करने में क्या बुराई।
    ऐसे लोगों को समाज द्वारा सम्मानित किया जाना चाहिये।

    Monday, 19 February, 2007

    मुगल गार्डन की सैर

    भारत के राष्ट्रपति के निवास राष्ट्रपति भवन में स्थित मुगल गार्डन को आम जनता के लिये खोल दिया गया है। मुगल गार्डन में स्थित स्परिचुअल गार्डन, हर्बल गार्डन एवं बैयोडाइवर्सिटी पार्क आदि को भी जनता के दर्शनार्थ खोला गया है। आम जनता के लिये मुगल गार्डन इस वर्ष 10 फरवरी से लेकर 18 मार्च तक सुबह 10.30 बजे से अपरान्ह 4.30 बजे तक खुला रहेगा। सोमवार को साप्ताहिक बंद है।

    मुगल गार्डन को सर एडविन लुटियन ने डिजाइन किया था। इस के डिजाइन की पेरणा उन्हें ताजमहल के बगीचों और जम्मू और कश्मीर के खूबसूरत मुगलिया बागों से मिली थी।

    मुगल गार्डन 15 एकड़ में फैला हुआ है। मुगल गार्डन के तीन भाग हैं। पहले भाग में आयताकार गार्डन है जो कि राष्ट्रपति भवन की मुख्य इमारत से लगा हुआ है। इस गार्डन में चार कोने हैं जिसके हर ओर टैरेस गार्डन है। यहां के सेन्ट्रल लॉन में राष्ट्रपति द्वारा कई पार्टीयों का आयोजन किया जा चुका है। दूसरा है लोन्ग गार्डन यानी लंबा बाग, इसी के साथ है तीसरा बाग सर्क्युलर गार्डन या गोल बाग। लंबे वाले बाग में गुलाब का बेहतरीन किस्में हैं। यह बाग इस बार का मुख्य आकर्षण है। गोल वाले बाग में एक फुव्वारा लगा है।

    मुगल गार्डन में 128 प्रकार के गुलाबों के फूल लगे हैं। अभी हाल ही में मुगल गार्डन में तीन नये फुव्वारे लगाये गये हैं। ये संगीतमय फुव्वारे हैं जो कि शहनाई और वंदेमातरम की धुनों पर घूमते हैं।

    इस रविवार को मैं अपने परिवार के साथ मुगल गार्डन घूम कर आई हूं, यह एक बहुत ही अविस्मरणीय अनुभव रहा। अगर आपने अभी तक मुगल गार्डन नहीं देखा तो यह एक सुनहरी मौका है, 18 मार्च तक आप प्रोग्राम बना सकते हैं। मुगल गार्डन आपको हमेशा याद रहेगा।

    मुगल गार्डन के कुछ चित्र (राष्ट्रपति जी की वेबसाइट से)

    उड़ने वाली कार तैयार है

    अत्यंत व्यस्त समय के दौरान सड़क पर लगने वाले जाम से निजात पाने के लिए क्या मन में कभी यह ख्याल आता है कि काश आपकी कार उड़कर आगे निकल जाती। आप सोच रहे होंगे कि ऐसा तो सिर्फ कार्टून फिल्मों में ही संभव है। कुछ दिन पहले तक तो आपकी यह सोच सौ फीसदी सही थी, लेकिन आज ऐसा नहीं है।
    अभी तक सिर्फ कार्टून फिल्मों में ही दिखने वाली उड़न कारें अब हकीकत बन चुकी हैं। ट्रांजिशन के नाम से विख्यात ये कारें अमेरिका में दो साल (2008 तक) के भीतर बिक्री के लिए उपलब्ध होंगी। इन कारों में 100 हार्सपावर का इंजन लगा होगा जो जरूरत पड़ने पर प्रोपेलर का काम करेगा। केवल एक बटन दबाते ही इससे पंख (डैने) निकल आएंगे और यह कार 120 मील प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकेगी। वहीं, जब कार को खाली सड़क मिलेगी तो इसके पंख आधा सिकुड़ कर काकपिट से चिपक जाएंगे। इसकी अनुमानित कीमत 1.48 लाख डालर है।
    मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी (MIT) में एयरोनाटिक्स और एस्ट्रोनाट्क्सि के स्नातक इस कार परियोजना पर जी-जान से जुटे हुए हैं। साथ ही इसके लिए टेराफुगिया के नाम से एक कंपनी का गठन भी किया गया है। कंपनी के एक मुख्य परिचालन अधिकारी के मुताबिक ट्रांजिशन सड़क पर चलने वाला एक एयरक्राफ्ट है और इसके लिए कंपनी को अभी 30 आर्डर मिल चुके हैं। इसमें एक बार में 20 गैलन ईधन भरा जा सकता है। यह सड़क पर एक गैलन में 40 मील की दूरी तय करेगा, वहीं उड़ान भरने पर इसका माइलेज 30 मील रहेगा। इस वायुयान का वजन आधा टन से थोड़ा ज्यादा है और इसके जरिए दो सवारियों और कुछ लगेज को ढोया जा सकेगा। यह 12 हजार फीट तक उड़ान भर सकेगा। हालांकि, इसके उड़ान भरने के बारे में ज्यादा उत्सुकता इसलिए नहीं है क्योंकि हवा में पंख फैलाने के लिए इसको सड़क पर तकरीबन एक मील का सफर तय करना होगा।

    ट्रांजिशन कार का सामने सेट्रांजिशन कार ऊपर से
    ट्रांजिशन कार साइड सेखुले हुये पंखों के साथ

    कड़ियां:

    Sunday, 18 February, 2007

    फ्रांस में ताजमहल

    Taj Mahal in Franceफ्रांस में चल रहे लेमन फेस्टिवल के दौरान नींबू से तैयार किए गये ताज महल के सामने नजर आ रहे हैं मोनैको के प्रिंस अल्बर्ट द्वितीय।

    Saturday, 17 February, 2007

    बच्चों की दुनिया

    क्या चल रहा है?

    काम कर रहे हो न?

    क्या बताऊं यार...

    सारी दुनिया खुश है.... सुखी है.....

    सभी अपने आप में मस्त हैं..

    अब इनको ही देखो....

    संगीत का आनन्द ले रहे हैं...!...

    सैर कर रहे हैं....

    पता नहीं ये बर्तन धो रहे हैं या...

    बर्तन इन्हें....

    दोस्ती करने का नया स्टाइल...

    अरे .. रे... रे.. मम्मी, कपड़ों में मैं भी हूं....!..

    कहां रखा है मेरा चॉकलेट...

    छोटा बच्चा जान के ...

    हमको न डराना रे.....

    क्या जोड़ी है...

    दूध के साथ.. दारु.. हिच...

    मजा आ गया....!!!...

    अरे भईया.. अब सोने भी दो..

    सबसे बढ़िया नींद तो ऐसे आती है....

    लो जी.. हो गये तैयार...

    भंगड़ा पाने को...... बल्ले बल्ले.. शावा..शावा..

    ये हैं कलयुग के रोमियो जूलियट...

    देखें तो सही.....

    सारी दुनिया में क्या चल रहा है...

    बहुत हो गया काम...

    अब थोड़ा सा आराम......

    लेकिन.. मम्मी आप ही ने तो कहा था..

    'वॉश द बेबी'....

    क्या करुं .. गर्लफ्रेंड से मिलने जाना है....

    याहू.....

    दुनिया वालों, मैं आ रहा हूं....

    देखो... सभी सुखी है....

    खुश हैं अपने आप में...

    मगर यहां....

    बड़ी टेंशन है यार.....!...

    Tuesday, 13 February, 2007

    अमेरिका में दहेज प्रथा भी हाईटेक

    वॉशिंगटन : अगर कहा जाए कि अमेरिकी समाज में भी दहेज का चलन है तो शायद आप यकीन न करें। लेकिन जनाब यह सही है, हां उनका तरीका हमसे थोड़ा अलग है। वे दहेज के मामले में भी हाईटेक तरीका इस्तेमाल करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका में लड़के वाले दहेज नहीं मांगते बल्कि खुद लड़की ही अपने दहेज का इंतजाम करती है। पति के घर जाते समय वह गृहस्थी की सारी जरूरतों को अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से इंटरनेट के माध्यम से जुटाती है। यहां बसे भारतीय मूल के लोग भी इसी तरीके को अपना रहे हैं। प्रचलन यह है कि विवाह की तैयारियां शुरू होने के साथ ही लड़की स्वयं इंटरनेट से दुकानों की वेबसाइट पर अपनी जरूरत व पसंद का सामान चुन कर बुकिंग कर देती है। इसके बाद मित्रों और संबंधियों को विवाह के निमंत्रण पत्र संग उन सभी सामानों की सूची भी भेज दी जाती है। मित्र और सगे संबंधी अपनी इच्छा और जेब के मुताबिक घर बैठे ही क्रेडिट कार्ड से उस सामान का भुगतान कर देते हैं। इस तरह जैसे-जैसे लोग सामान खरीदते जाते हैं, दुकानों की वेबसाइट पर उसे बिका हुआ दिखा दिया जाता है। लड़कियों का कहना है कि इससे उन्हें काफी सुविधा होती है। एक तो मित्रों और संबंधियों द्वारा दिया गया सारा सामान स्वयं उनकी पसंद और जरूरत के हिसाब से होता है। दूसरे एक ही जैसे उपहार मिलने और गैर जरूरत का सामान मिलने की भी संभावना खत्म हो जाती है।

    कार धोते हैं भारतीय डाक्टर

    लंदन : हिंदी में एक कहावत है कि चौबे जी छब्बे बनने चले दुबे रह गये। कुछ ऐसा ही हाल भारतीय डाक्टरों के साथ इंग्लैंड में हो रहा है। यदि आप किसी रेस्तरां में पहुंचते हैं या लंदन के सबसे गरीब उप नगरीय क्षेत्र ईस्ट हैम में पहुंचते हैं तथा अपनी कार धुलवाना चाहते हैं तो संभव है कि इस काम के लिए कोई भारतीय डाक्टर आपके सामने पेश हो जाए। दरअसल भारत से चिकित्सा शिक्षा लेने के बाद ब्रिटेन के आकर्षण में खिंचे ये डाक्टर रेस्तरां में वेटर का काम भी करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। ऐसे हजारों डाक्टर ब्रिटेन के नए आप्रवासन कानून से आहत हैं। अप्रैल 2006 में बनाए गए आप्रवासन कानून में परिवर्तन करते हुए अब डाक्टरों को यहां विदेश से पहुंचकर अपनी सेवा देना सरल नहीं रह गया है। खासतौर पर ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा में नौकरी पाना तो असंभव ही हो गया है। इनकी निराशा और चिंता गंभीर है। ब्रिटेन में डाक्टरों को नौकरी देने संबंधी परिस्थितियां काफी जटिल रही हैं, लेकिन नए कानून के बाद तो यह और कठिन हो गई हैं। पहले से भी डाक्टरों को यहां अपनी जगह बनाने में काफी समस्या आती रही है। खासतौर पर भारत से पहुंचे डाक्टरों को यहां राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा में शामिल होने के लिए एक अनिवार्य परीक्षा देनी होती है। हजारों डाक्टरों को यहां ईस्टहैम की झुग्गियों में शरण लिए देखा जा सकता है। वे दो लोगों के लिए बनाई गई कोठरी में किसी तरह अपने दस साथियों के साथ निवास कर रहे हैं। इतना ही नहीं जिन घरों में ये डाक्टर रह रहे हैं, उनमें चूहे, तिलचट्टे और खटमलों की भरमार है।

    भारत में डाक्टरी के पेशे को काफी सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है, यहां पर डाक्टर आम तौर पर समाज के उच्च वर्ग के माने जाते हैं। इन्हें भगवान का दर्जा भी दिया जाता है। ऐसे में डाक्टर विदेशों में ऐसे दूसरे दर्जे के नागरिक बन कर आखिर क्या पाने के लिये जाते हैं?

    Sunday, 11 February, 2007

    वेलेंटाइन डे पर बचें कंप्यूटर वायरस से

    वेलेंटाइन डे नजदीक है। इंटरनेट पर प्यार के इजहार वाले संदेश देखने के पहले थोड़ा सावधान रहे क्योंकि वेलेंटाइन डे के रोमांच पर कंप्यूटर वायरस की नजर है। हो सकता है कोई आपको प्यार के बदले वायरस ई मेल कर दे और आप मोहब्बत के चक्कर में अपना पूरा नेटवर्क तबाह कर लें। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि Together U and I, Till the end of time, My heart belongs to you, Heart of Mine एवं अन्य मिलते जुलते प्यार भरे और गर्मजोशी से भरे ई-मेल को खोलने से दूर ही रहें क्योंकि इनमें प्यार का संदेश नहीं, कंप्यूटर वायरस हैं जो आपके सेट को ठप कर सकता है। उनका यह भी कहना है कि वेलेंटाइन डे और उसके अगले एक-दो दिन तक अपना एंटी वायरस प्रोग्राम चालू रखें और अनावश्यक ई मेल्स से दूर ही रहें।

    गौर करने वाली बात ये है कि पहले भी एक बार I Love You वायरस अपना फैलाव करके बहुत नुकसान कर चुका है।

    बॉस - एक भारतीय ऑपरेटिंग सिस्टम

    BOSS(Bharat Operating System Solutions) ओपेन-सोर्स सोफ्टवेयर को देश में बढ़ावा देने के लिये C-DAC के फ्री/ओपेन सोर्स सोफ्टवेयर के राष्ट्रीय संसाधन केन्द्र (National Resource Centre for Free/Open Source Software (NRCFOSS)) द्वारा तैयार किया गया लाइनक्स का एक संस्करण है। इसे खास तौर पर भारतीय परिस्थितियों के लिये तैयार किया गया है। इसमे एक सुन्दर डेस्कटॉप है, जिसमें भारतीय भाषाओं का खास समावेश किया गया है। इसके अलावा इसमें भारत के सरकारी क्षेत्र में प्रयोग होने वाले साफ्टवेयर पैकेजों को शामिल किया गया है।

    विशेषतायें

    • चित्रमय इंस्टालर
    • सिस्टम की तेज शुरूआत और
    • दोस्ताना जी-नोम (GNOME) डेस्कटाप
    • वाडियो के लिये ज्यादा सहयोग
    • 3D डेस्कटाप
    • भारतीय-OO (BharatheeyaaOO) - ओपेन ऑफिस 2.0.1 का भारतीय संस्करण (इस समय केवल हिंदी और तमिल में उपलब्ध)
    • पेन ड्राइव, सीडी व अन्य मीडिया के लिये सहयोग
    • लाइफेरिया (Liferea) – RSS/RDF रीडर
    • टीवी ट्यूनर कार्ड सपोर्ट
    • ब्लूटूथ (Bluetooth) सपोर्ट
    • अच्छे इंटरनेट टूल – Firefox, Gaim, Xchat
    • Input Method - SCIM with Remington Keyboard Layout for Tamil, Hindi, Punjabi,and Marati
    • बोनफायर - एक CD/DVD Burning tool

    बॉस बनाने वालों उद्देश्य इसे भारत की सभी 22 राष्ट्रीय भाषाओं में काम करनेलायक बनाना है ताकि अंग्रेजी न जानने वालों तक भी सूचना प्रौद्योगिकी का फायदा पहुंच सके, जो कि अभी तक नहीं पहुंच पाया है।

    बॉस के बारे में और जानने के लिये इसके विकी पेज (BOSS Wiki) की यात्रा करें जहां आपको बॉस के चित्र तथा विवरण मिलेगा। आप अपने विचार भी व्यक्त कर सकते हैं। अगर आपकी इस बारे में कोई और जिज्ञासा है तो आप bosslinux@cdac.in पर ई-मेल कर सकते हैं। बॉस को निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। आप इसे सीधे डाउनलोड कर सकते हैं।

    कड़ियां:

    1. फ्री/ओपेन सोर्स सोफ्टवेयर के राष्ट्रीय संसाधन केन्द्र
    2. बॉस विकी पेज
    3. BOSS 1.0 CD Released
    4. Free and Open Source Software (FOSS)

    Saturday, 10 February, 2007

    असली बॉस कौन है

    कल आशीष गुप्ता जी ने महिलाओं का रासायनिक विश्लेषण किया था। लेकिन उनको हम महिलाओं की सही पहचान नहीं है। हम रासायनिक ही नहीं बल्कि भौतिक रुप से भी पुरूषों पर भारी हैं। इस के लिये मैंने ढ़ूढ़कर ये चित्र निकाले हैं। अब इन चित्रों को आप भी देखिये। हास्य का जवाब हास्य से।

    Friday, 9 February, 2007

    पिलाओ मगर प्यार से

    बीजिंग : अगर कोई चीनी आपका दोस्त है तो उसे जबरन शराब पिलाने की कोशिश मत करिएगा। हो सकता है आपके इस आग्रह से वह नाराज हो जाए क्योंकि चीनी लोगों को शराब के साथ जिद पसंद नहीं। चीन के सेंट्रल टीवी द्वारा शराब पिलाने की परंपरा को लेकर हुए सर्वेक्षण में यह रोचक बात सामने आई है। सर्वेक्षण के अनुसार यहां की महफिलों में मेहमानों की खिदमत के लिए शराब पिलाने की परंपरा तो है, लेकिन 50 फीसदी लोग पीने-पिलाने के साथ जबरदस्ती पसंद नहीं करते। इस सर्वेक्षण में 15 फीसदी लोगों ने स्वीकार किया कि चीनी परंपरा के तहत समारोह में शराब परोसी जानी चाहिए। हालांकि, 35 फीसदी लोगों ने इस बात पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। चीन की विज्ञान व प्रौद्योगिकी संस्था द्वारा किए गए इस सर्वेक्षण में लोगों ने जहां-तहां थूकने, बिना रुमाल के नाक साफ करने, जबरन शराब पिलाने और शराब पीकर दु‌र्व्यवहार करने के साथ-साथ सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान करने को दस सबसे खराब आदतों में शामिल किया है। हालांकि, ज्यादा शराब पीना जान के लिए घातक भी है। चीन में साल 2006 में लगभग 90,000 लोग तेज रफ्तार से या नशे में गाड़ी चलाने के कारण हुए सड़क हादसों में मारे गए।

    Hindi Film Scenes फिल्मी सीन

    हमारी हिंदी फिल्मों में कुछ ऐसे सीन होते हैं जो लगभग हर दूसरी फिल्म में शामिल होते हैं। ऐसे ही कुछ सीन यहां है:

    • हीरो हमेशा फर्स्ट क्लास फर्स्ट पास होता है और हमेशा BA करता है। MA तो कभी भी नहीं। आजकल की फिल्मों में थोड़ा परिवर्तन हुआ है अब हीरो MBA करता है।
    • अमीर प्रवासी भारतीय लड़के (हीरो) का नाम अधिकतर राज, आर्यन या राहुल होता है।
    • भारत के किसी भी जगह के गांव की कहानी हो, वहां की बोली हमेशा पूर्वी उत्तर प्रदेश के गांवों की होती है।
    • गांव की गोरी (हीरोईन) हमेशा चोली घाघरा ही पहनती है और उस पर हमेशा ही जमींदार या उसके बेटे की गंदी निगाह होती है।
    • गांव में रिटार्यड फौजी होता है जो बात बात में डींगें मारता है।
    • कहानी अगर शहर की तो रिटार्यड फौजी न होकर रिटार्यड कर्नल होगा जिसकी घनी मूंछें होती हैं और वो बात बात में गोली मारने की बात करता है तथा बर्मा की लड़ाई (कब हुई थी?) की कहानी सुनाता है।
    • अगर फिल्म में दो हीरो हों तो दोनो एक ही लड़की को चाहेंगे, दोनों ही एक दूसरे के लिये अपना प्यार कुर्बान करने को तैयार रहते हैं।
    • दो हीरो वाली फिल्मों में, दोनों हीरों में एक बार गलतफहमी तथा लड़ाई अवश्य होगी, यह लड़ाई हमेशा बराबरी पर छूटती है। अगर चाकू का इस्तेमाल इस लड़ाई में हो रहा है तो पहले एक हीरो की आंख या गर्दन तक चाकू जायेगा, फिर दूसरे हीरो की आंख और गर्दन तक।
    • हीरो चाहे जो करता हो, वो कार चला सकता है तथा जरुरत पड़ने पर हैलीकॉप्टर तथा हवाई जहाज उड़ा सकता है।
    • पुलिस हमेशा फिल्म के अन्त के आती है।
    • विलेन पूरी फिल्म में मौज करता है तथा कोई भी बात करते समय या गलत काम करते समय जोर जोर से हंसता रहता है।
    • अगर विलेन ऊंचे से या खास तौर पर हैलीकॉप्टर से भागते हुये हीरो पर गोली बरसाता है तो गोलियां हीरो के दोनो ओर लाइन बनाती हई गिरती हैं लेकिन हीरो को एक भी नहीं लगती है, अगर हीरो नीचे हैलीकॉप्टर पर निशाना लगाये तो एकदम निशाना लगता है। ये बात हॉलीवुड की फिल्मों पर भी लागू होती है।
    • हिन्दी फिल्मों के विलेन को फाईटिंग नहीं आती है।
    • हीरो जब विलेन को मार मार कर बाजी जीत रहा होता है तभी पता नहीं क्यों हीरो की हीरोईन, बहन एवं मां वहां आ जाती हैं जिन्हे विलेन के आदमी पकड़ लेते हैं तथा बाजी पलट जाती है।
    • विलेन के नाम डì