हमारे आसपास के सभी बड़े डिपार्टमेंटल स्टोर्स में और लगभग सभी शोरुम में, कंपनियों के आउटलेटस में सभी मॉलों में आजकल 99 के आंकड़े का बडा जोर है। जो भी चीज खरीदने जाओ उसके दामों में 99 जरुर लगा रहता है। बात चाहे रसोई से संबंधित सामान की हो, कपड़ो की हो या सोन्दर्य प्रसाधनों की हो, 99 का जादू हर जगह चल रहा है।
दरअसल कंपनियां ग्राहकों को सामान की कीमत के बारे में पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक असर को कम करने के लिये ही ऐसा कर रही हैं। 500 रुपये का सामान ग्राहक को मंहगा लग सकता है लेकिन 499 रुपये पर ग्राहक सामान को खुशी से खरीद लेते हैं। ग्राहक के दिमाग में 400 रुपये की रेंज रहती है भले ही 499 रुपये 500 रुपये से सिर्फ 1 रुपया कम है।
पहले जब हम छोटे थे तो 99 का यह रुप सिर्फ बाटा के जूते च्पपलों के दामों में दिखता था। बाटा के दामों मे बडीं खूबसूरती से 99 और 95 का प्रयोग होता था। दाम 49.95 रुपये या 98.95 रुपये होते थे। अब तो लगभग सभी कंपनियां 99 और 95 या यूं कहें कि 9 के जादू को ग्राहकों पर चला रही हैं।