Tuesday, 22 April, 2008

अपनो द्वारा ही मारे जाते लोग

ये कोई अच्छी बात नहीं है लेकिन बहुत गंभीर और सोचने वाली बात है। पिछले महीनों से समाचारों मे देख रही हूं कि लोग घरों में अपनों द्वारा ही या तो मारे जा रहे हैं या मरवाये जा रहे हैं।

अभी हाल के दिनों में ही दिल्ली के कालकाजी इलाके में एक व्यक्ति द्वारा अपनी बहन और बहनोई को संपत्ति के लिये मरवाने की साजिश की गई जिसमें बहनोई की दिन दहाड़े हत्या की गई, मेरठ में सगे भाई द्वारा भाई की हत्या करवाई गई, गाजियाबाद में युवक द्वारा अपने मां-बाप और बहन को घायल किया गया, दिल्ली पालम राजनगर में युवक ने अपने को गोद लेने वाले मां-बाप और पत्नी की हत्या कर दी। अमरोहा में तो घर की लड़की ने घर के सात लोगो का कत्ल अपने प्रेमा के साथ मिलकर कर दिया।

ये तो सिर्फ कुछ घटनाओं का जिक्र है, वर्ना न जाने कितनी ऐसी बरदाते रोजाना समाचार पत्रों में छपती हैं। आखिर ये सब क्या हो रहा है?  हमारे समाज में ऐसा क्या हो गया है कि लोग इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। समाज को इस पर विचार करने की जरुरत है। कहीं न कहीं कई बुराईयां घरों को तबाह कर रही हैं। समाचार माघ्यमों और समाज में इस बारे में अभी तो कुछ विचार-विमर्श होता हुआ नहीं दिख रहा है। अमेरिका में किसी छात्र द्वारा स्कूल में अपने साथियों की हत्या हो जाने पर यहां के समाचार पत्रों में तमाम संपादकीय लिख कर अमेरिकी समाज को खूब सलाहें दी जाती हैं, लेकिन अपने यहां इतना सब कुछ हो रहा है उस के ऊपर कोई चर्चा नहीं हो रही है।

या तो लोगों को कानून का न डर रह गया है न उसकी परवाह या फिर लोग इतने व्यक्तिवादी हो गये हैं कि दूसरों को मिटाने पर तुले हैं। गंभीरता से हमें इस विषय पर चिंतन करना होगा वर्ना स्थिति बहुत गंभीर हो जायेगी।

2 टिप्पणी:

Udan Tashtari said...

बेहद अफसोसजनक और चिंतनीय.

अतुल said...

गभीर और चिंताजनक बात.

कुल पेज देखे गये