हमारा भारत विविधताओं से भरा देश है। इसके कण कण में व्याप्त है भांति भातिं की बातें। सैंकड़ों भाषाऐं, बोलियां, रीतियां, पहनावे के ढंग विविधता पूर्ण हैं। भारत को खुद के अनुभव से ही जाना जा सकता है। किताबी ज्ञान के बजाये भारत भ्रमण करके ही भारत को जाना जा सकता है। भारत की विशाल विविधता के बावजूद सांस्कृतिक तौर पर भारत हमेशा से एक रहा है। भारत की विविधता पूर्ण जिन्दगी का जिसने भ्रमण कर अध्ययन कर लिया वो ज्ञाना बन गया। शायद इसी ज्ञान को सर्व जनों को पहुंचाने के उद्देश्य से शंकराचार्य जी ने भारत के चारों कोनों में चार धाम स्थापित किये थे और इनके दर्शनों को करने का आग्रह किया गया है। वैदिक काल में भी भारत के कोने कोने में शंकर भगवान के 12 ज्योतिर्लिंग, 52 देवी मंदिर एवं 4 कुम्भ मेला स्थल स्थापित करके भारत दर्शन का प्रबंध किया गया था।
भारत के कोने कोने के दर्शन करके ही भारत में कोई व्यक्ति या नेता महान बनता है। पुराने जमाने में राम और पांडवों ने अपने वनवास मे भारत को जाना था। गांधी जी भारत के कोने कोने में जाते थे और आजादी की अलख जगाते थे। नेहरुजी और इंदिरा जी सब भारत से पूर्ण परिचित थे। कुछ नेता जो अपने समय में अपने राजनितिक कौशल और प्रशासनिक कुशलता के लिये जाने जाते थे, अपने क्षेत्र के बाहर प्रभावी नहीं बन सके क्योंकि वो कभी भारत को न जान सके। आजकल कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी भी भारत को जानने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधानमंत्री या कोई और बड़ी पोस्ट पर वो जा सकते हैं लेकिन मेरा मानना है कि अगर उन्हें नेहरुजी और इंदिरा जी की तरह प्रभावशाली जननेता बनना है तो उन्हें कम से कम 5 साल पूरे भारत का भ्रमण करके भारत को, भारत की अच्छाइयों को, भारत की समस्याओं को समझना चाहिये। ये बात दूसरी पार्टियों के नेताओं पर भी लागू होती है।









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