Wednesday, 6 February, 2008

इंटरनेट बढ़ा रहा दूरी

एक सरवेक्षण के अनुसार उन अभिभावकों के लिए बुरी खबर है जो अपने बच्चों को आधुनिकतम जानकारियों से लैस करने के लिए उन्हें इंटरनेट प्रेमी बना रहे हैं।

शोधकर्ताओं का कहना है कि ऑनलाइन के असीमित संसार में खोए बच्चे जाने-अनजाने अपने मां-बाप से दूर हो रहे हैं। खाई इस कदर गहरा रही है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे की भावनाओं से पूरी तरह अनभिज्ञ होते जा रहे हैं। इंटरनेट प्रेमी बच्चे मां-बाप से बात करने की बजाय ऑनलाइन मैसेजिंग या ब्लागिंग में ज्यादा मशगूल रहते हैं।

इस्राइल के तेल अवीव विश्वविद्यालय के शोधार्थियों के एक दल ने माता-पिता और बच्चों के बीच बढ़ती खाई को रेखांकित किया है। उन्होंने अपने अध्ययन में पाया कि अपने बच्चों के ऑनलाइन ज्ञान के बारे में मां-बाप कुछ और सोच रहे हैं और बच्चे इंटरनेट पर कुछ और कर रहे हैं। यानी विभिन्न साइटों पर जाकर नियमित चैटिंग करने जैसी हरकतें या सोशल नेटवर्किंग साइटों पर ऑनलाइन रहना आदि।

अक्सर माता-पिता नहीं जानते कि उनके बच्चे इंटरनेट पर क्या कर रहे हैं। वे बच्चों के चैटिंग व अन्य वाकिफ नहीं होते। शोधार्थी इस नतीजे पर माता पिता और उनकी संतानों पर किए गए सर्वेक्षण के बाद पहुंचे हैं। अपने अध्ययन में विशेषज्ञों ने विभिन्न आयु वर्ग और सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के 500 से बच्चों को शामिल किया गया । सर्वे में इन बच्चों के मां-बाप को भी शामिल किया गया था। जब इन बच्चों से पूछा गया कि क्या वे अपनी निजी जानकारियों को अपने माता-पिता से साझा करते हैं? 73 फीसदी बच्चों ने कहा कि हां, उन्होंने ऐसा किया। लेकिन उन्हीं बच्चों के मा-बाप ने कहा कि बच्चों ने केवल चार प्रतिशत जानकारियां ही उन्हें दी हैं।

चैटिंग के दौरान आनलाइन पर संपर्क में आए अजनबियों से आमने-सामने मुलाकात की बाबत जब पूछा गया तो उच्च विद्यालय में पढ़ने वाले 36 फीसदी बच्चों ने माना कि जिन अजनबियों से वे आनलाइन मिले, उनसे वे बाद में आमने-सामने भी मिले। सिर्फ नौ फीसदी माता-पिता को अपनी संतान के अपरिचितों से मिलने के बारे में पता था। अध्ययन में पता चला कि 9 से 18 साल की उम्र के 30 फीसदी बच्चों ने अपने ब्राउजर से सर्च हिस्ट्री को मिटा दिया, ताकि उनके माता पिता को इसका पूरा ब्यौरा नहीं मिल सके।

यह स्थिति भारत में भी है। हाल में ओरकुट से संबंधित कई घटनायें सामने आई हैं।

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