Thursday, 25 October, 2007

महेन्द्र सिंह धोनी का नया रुप

महेन्द्र सिंह धोनी ने अपने बाल कटवा कर अपने आप को नया 'लुक' दिया है। उन्होंने ऐसा क्यों किया है? क्या दीपिका पादुकोण के कहने पर !!! या फिर विकेट के पीछे बड़े बाल कैच छुड़वा रहे थे।

खैर आप भी देखिये तो धोनी नये रुप में कैसे लग रहे हैं।


Wednesday, 17 October, 2007

Drivers Sher and Dialogue

ट्रक ड्राइवरों के शेर और वाक्य



"आगे वाला कभी भी खड़ा हो सकता है।"

"तेरह के फूल सत्रह की माला, बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला।"

"बुरी नजर वाले तेरे बच्चे जियें, बड़े होकर तेरा खून पियें।"
"पहले जय शंकर की बोलो, फिर दरवाजा खोलो"
"हम तो दरिया हैं समंदर में जायेंगे
चमचों का क्या होगा वो कहां जायेंगे"
"मालिक तो महान है, चमचों से परेशान है"
"देता है रब, जलते हैं सब"
"मालिक की गाड़ी, ड्राइवर का पसीना
चलती है रोड पर बनकर हसीना"

वॉग मैगजीन अब भारत में भी

अपनी पसंद की मैगजीन फेमिना लेने पास के ही स्टाल पर जाना हुआ तो देखा कि वॉग (Vogue) भी नई पत्रिकाओं की भीड़ में रखी है। बुक स्टाल वाले ने बताया कि ये अब यहां भी शुरु हो गई है। उत्सुकतावश वॉग का पहला संस्करण तो खरीद लिया ये देखने के लिया कि आखिर इस मैगजीन की इतना नाम है, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई देशों में छपती है, चलो देखते हैं। पहला संस्करण 356 पेज का मोटा सा 100/- की कीमत का है। अधिकांश पत्रिका मंहगी चीजों और विलसिता वाली चीजों के विज्ञापनों से भरी हुई है। ज्यादातर विज्ञापन मंहगी घड़ियों के हैं। विदेशी पत्रिकायें अब एक एक करके भारत में आती जा रही हैं। वॉग के मुकाबले के लिये पहले से ही कोस्मोपोलिटन (Cosmopolitan) पत्रिका भारत में छप रही है। इन विदेशी पत्रिकाओं का मुकाबले के लिये भारत की पत्रिकाओं वुमेन्स ऐरा (Women's Era) और फेमिना (Femina) ने भी अपना स्तर बढ़ा लिया है। ये भी अब मोटी मोटी आने लगी हैं। अब पढ़ने वालों के पास ज्यादा विकल्प हैं।

Saturday, 6 October, 2007

भारतीय कर्मचारी बने विदेशी कंपनियों की पसंद

भाषा की एक खबर के अनुसार बीपीओ और सॉफ्टवेयर क्षेत्र में अपनी दक्षता का लोहा मनवा चुके भारतीय पेशेवर अब कई देशों की पहली पसंद बन चुके हैं। यही कारण है कि अमेरिका, फ्रांस व जर्मनी की कंपनियां योग्य कर्मचारियों की तलाश में भारत का रुख कर रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इन देशों की कंपनियों का मानना है कि भारत में विश्व स्तरीय योग्यता प्राप्त लोग हैं। ग्लोबल मैनेजमेंट कंसल्टेंसी कंपनी बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) के भागीदार और निदेशक जेम्स वी. अब्राहम ने भाशा को बताया कि योग्य कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे देशों के लिए भारत सबसे पसंदीदा गंतव्य है। अमेरिका में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पैदा हुई पीढ़ी अब रिटायरमेंट के कगार पर है। साथ ही ज्यादातर पश्चिमी देशों में औसत उम्र बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इन कंपनियों की निगाह में चीन के कामकाजी कार्यबल का स्थान दूसरा है। पश्चिमी देशों की कंपनियां यहां के लोगों का चुनाव विशेष तौर पर चीन में परिचालन करने के लिए ही करती हैं, जबकि भारतीय कार्यबल का उपयोग किसी भी देश में काम करने के लिए किया जाता है। कंसल्टेंसी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी केपीएमजी के मेलबर्न स्थित भागीदार बर्नार्ड साल्ट ने कहा कि भारतीय कार्यबल पिछले 100 सालों की ऊंचाई पर है। यहां योग्य लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है। उनकी योग्यता अंतरराष्ट्रीय स्तर की है और पश्चिमी देश सबसे ज्यादा इन्हीं के पीछे भागते हैं। उन्होंने कहा कि दक्षिण-पूर्व एशिया और पश्चिम-एशिया जैसे क्षेत्रों में जड़ सामाजिक व्यवस्था और तकनीकी मामलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता की कमी के कारण भारत फायदेमंद स्थिति में है। अमेरिकी पत्रिका बिजनेस वीक ने हाल ही में कॅरियर लांच करने वाली श्रेष्ठ अमेरिकी कंपनियों की एक सूची छापी थी। इसमें 10 में से नौ कंपनियों के कर्मचारियों में भारतीयों की संख्या ज्यादा है।

Friday, 5 October, 2007

टीवी के नृत्य आधारित कार्यक्रम

टीवी पर आजकल नृत्य आधारित कार्यक्रमों की धूम मची हुई है। नच बलिये-3 पहले शुरु होकर धूम मचा रहा था, अब झलक दिखला जा -2 भी प्रारम्भ हो गया है। दोनो ही कार्यक्रमों में टीवी व फिल्मी जगत की कई नामी गिरामी जोडियां और हस्तियां भाग ले रही हैं। हमारे देश में नाचने गाने की बहुत पुरानी परंपरा रही है, यही कारण है कि हमारी फिल्मों में नाच व गान फिल्म का अभिन्न अंग होता है। गाने और डांस की लोकप्रियता फिल्म को हिट या फ्लाप करवा सकती है। नृत्य की इसी लोकप्रियता को भुनाने के लिये ये नृत्य आधारित कार्यक्रम शुरु किये गये हैं। पहले प्रयासों में भी नच बलिये व झलक दिखला जा कार्यक्रम काफी सफल रहे थे। मुझे इस तरह के कार्यक्रम काफी अच्छे लगते हैं। घर के सभी सदस्यों को डांस के प्रोग्राम काफी पसंद हैं। बच्चे ऐसे कार्यक्रमों को बड़े चाव से देखते हैं।

टीवी पर इन दोनों कार्यक्रमों से पहले भी कई प्रोग्राम आते रहे हैं। दूरदर्शन पर नृत्य का अखिल भारतीय कार्यक्रम बहुत समय पहले से चला आ रहा है। सोनी टीवी पर आने वाला बूगी-वूगी भी खासा लोकप्रिय कार्यक्रम है। जहां दूरदर्शन का नृत्य का कार्यक्रम क्लासिकल डांस पर आधारित है वहीं बूगी-वूगी फिल्मी गानो पर डांस का आम लोगो को मौका देता है। नच बलिये व झलक दिखला जा कार्यक्रम भी फिल्मी गानों पर आधारित हैं लेकिन इनमें आम आदमी की कोई भागीदारी नहीं है। आम आदमी प्रसिद्ध हस्तियों को देखकर अपना मनोरंजन कर सकता है बस।

टीवी के ये कार्यक्रम चूंकि मेरे घर में सबको पसंद हैं इसलिये हमने ढूंढ़-ढांढ़कर अन्य टीवी चैनलों पर भी कई नृत्य आधारित कार्यक्रम पता किये हैं जिन्हें हम उतने ही चाव से देखते हैं। टीवी इन सभी प्रोग्रामों की सूची मे कई चैनल हैं।

  1. दूरदर्शन का नृत्य का अखिल भारतीय कार्यक्रम, काफी पुराना प्रोग्राम है, सादगी से पेश होता है। उच्च स्तर का कार्यक्रम।
  2. सोनी टीवी का बूगी-वूगी जिसे पुराने हास्य कलाकार जगदीप के बेटे जावेद और नावेद पेश करते हैं। यह कार्यक्रम शुक्रवार और शनिवार को शाम 8 बजे से 9 बजे तक प्रसारित होता है। यह कार्यक्रम अपने 11 वें वर्ष में चल रहा है।
  3. एमएच-1 (MH1) जो कि एक पंजाबी चैनल है, पर शनिवार को शाम 8.30 बजे से 9.30 बजे तक आजा नच ले। इसे पेश करती हैं पॉप सिंगर सनोबर व टीवी स्टार संगीता घोष।
  4. सोनी टीवी का ही झलक दिखला जा जो कि शुक्रवार और शनिवार को शाम 9 बजे से प्रसारित होता है। यह कार्यक्रम टीवी कलाकारों की जोडियों के नाच की प्रतियोगिता है।
  5. स्टार प्लस पर शुक्रवार और शनिवार को शाम 8 बजे से प्रसारित होता है नच बलिये-3, इसका प्रारुप भी झलक दिखला जा की तरह का है जिसमें बड़े कलाकार नाचते हैं।
  6. स्टार विजय पर शुक्रवार-शनिवार को शाम 8 बजे से प्रसारित होता है जोड़ी नं-1 कार्यक्रम।
  7. ईटीवी तेलुगु (ETV Telugu) पर स्टारवार के नाम से शनिवार की शाम 8 बजे से 8.30 बजे तक नाच का कार्यक्रम।
  8. मलयालम टीवी चैनल अमृता पर सोमवार से शुक्रवार सुपर डांसर जूनियर प्रोग्राम प्रसारित होता है। इसी चैनल पर बड़ो का सुपर डांसर कार्यक्रम भी आता है।
  9. तेलुगु चैनल जैमिनी पर रविवार की शाम 9 बजे डांस बेबी डांस कार्यक्रम आता है।

ये सभी तो वो कार्यक्रम हैं जो हम आम तौर पर देखते हैं। कई प्रोग्रामों का समय आपस में टकराता है इसलिये जब इनका दुबारा प्रसारण (Repeat Telecast) होता है तब देखना पड़ता है। क्षेत्रीय भाषाओं के टीवी चैनलों के कार्यक्रम में जो हमने खास बात देखी कि वहां डांसर अपनी भाषा के गानों पर तो नृत्य करते ही हैं, लगभग हर दूसरा-तीसरा गाना हिंदी फिल्मों का होता है। इससे यह बात तो पता चलती है कि हिंदी फिल्में सब जगह देखी और समझी जाती हैं।

इनके अलावा भी नृत्य आधारित कई कार्यक्रम होंगे जो कि हमारी जानकारी में नहीं है। किसी को पता हों तो हमें भी बताइये।

कहने के कुछ करने के कुछ

हाल ही में संजय बेंगाणी जी ने तरकश पर अपने ब्लॉग में बताया था कि होने और दिखने में फर्क होता है। अंग्रेजी न आती हो तो भी बोलें जरुर, बुद्धिमान न हों लेकिन दिखें जरूर,  "धर्मनिरपेक्ष" दिखें जरूर इत्यादि।

इधर आई टी इंडस्ट्री में भी कुछ ऐसा ही है। यहां ओपेन सोर्स की बात करना लेटेस्ट फैशन है। 95% से ज्यादा लोग अपने व्यक्तिगत कंप्यूटर या लैपटॉप पर माइक्रोसोफ्ट की विंडोज और अन्य सोफ्टवेयर इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बातचीत में "स्टाइल" ओपेन सोर्स सोफ्टवेयर की तारीफ से ही आती है। अधिकांश लोग अपने कंप्यूटर पर पाइरेटेड विंडोज व ऑफिस सोफ्टवेयरों का प्रयोग करते हैं, ओपेन सोर्स के निशुल्क सोफ्टवेयर का प्रयोग नहीं करते हैं, लेकिन ओपेन सोर्स की तारीफ ऐसे करते हैं जैसे कि सबसे ज्यादा इन्होंने ही ओपेन सोर्स के सोफ्टवेयर के निर्माण में योगदान दिया हो।

इसलिये संजय जी की बात बिलकुल सही है कि  होने और दिखने में फर्क है। लोगों की काम कहना कुछ और करना कुछ है।

Thursday, 4 October, 2007

शाहरूख खान के सफल दांव

शाहरूख खान आजकल बंबइया फिल्मों के बेताज बाजशाह हैं। उनकी अधिकांश फिल्में बॉक्स-ऑफिस पर सफल रहती हैं। शाहरुख खांन की लोकप्रियता भारत के बाहर भी बहुत ज्यादा है। पाकिस्तान, मध्य-पूर्व, अमेरिका एवं Shahrukh Khan by hindibaat.blogspot.com इंगलैंड में शाहरुख खान की फिल्में धूम मचाती हैं।

शाहरूख खान ने अपने पहले ही टीवी सीरियल फौजी में ही लोगों को अपना दीवाना बना दिया था। फिर शाहरूख खान नें दीवाना फिल्म से बॉलीवुड में धमाकेदार प्रवेश किया। शाहरूख खान एक एक करके सफलता की ऊंचाइयां चढ़ते हुये आज सुपरस्टार बन गये हैं। शाहरूख खान की इस सफलता के पीछे उनकी लगन, मेहनत और किस्मत के साथ-साथ समझदारी से एक एक कदम रखना भी है। शाहरूख खान ने शुरु से ही फूंक फूंक का कदम रखे हैं। शाहरूख ने अपनी कमियों और अच्छाइयों को पहचान करके अपने दांव चले जो बिलकुल सही पड़े। शाहरूख खान जनता की नब्ज पहचान करके फिल्में करते हैं।

जब शाहरूख फिल्मों में आये तो बॉलीवुड की फिल्मों में कहानी कहने और किरदार निभाने मे परिवर्तन में कुछ बदलाव की ओर शुरुआत हुई थी। बुरे चरित्र के लोगों के उपर भी फिल्में बनाने का साहस फिल्म निर्माता और निर्देशक कर रहे थे। ऐसे में शाहरूख खाम ने अच्छा मौकाShahrukh Khan in Om shanti Om by hindibaat.blogspot.com जान कर नकारात्मक चरित्र वाली तीन फिल्में बाजीगर, डर और अंजाम को कर के अपने आप को एक अच्छे और सफल अभिनेता के रूप में स्थापित कर लिया। शाहरुख खान ने हमेशा यही कोशिश की कि वो ऐसी फिल्में करें जो उनको एक्टिंग करने वाले अभिनेता के रुप में पहचान बनाने में सहायक हों। साथ ही साथ शाहरुख की कोशिश हमेशा से ही ऐसी रही कि अच्छे निर्माता निर्देशक के साथ काम करें और जहां तक हो सके जमे-जमाये फिल्मी घरानों की फिल्में कर सकें। शाहरुख खान ने आर्ट-कामर्शियल फिल्म का मिश्रण बनाने वाले अजीज मिर्जा के साथ कई फिल्में की जिसमें राजू बन गया जेन्टलमैन, यस बॉस, चलते-चलते, फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी आदि प्रमुख हैं। एक और बड़े निर्माता निर्देशक राकेश रोशन के साथ शाहरुख खान ने कोयला, किंग अंकल और करण अर्जुन कीं।

शाहरुख खान की सबसे बड़ी सफलता थी यश चोपड़ा के कैम्प में प्रवेश। आम तौर पर राकेश रोशन, सुभाष घई, यश चोपड़ा की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल होने की गारंटी मानी जाती हैं। यश चोपड़ा की फिल्में भव्य स्तर पर बनाई जाती हैं जिनकी अधिकांश शूटिंग विदेशी स्थलों पर की जाती है तथा गाने आम तौर पर जबर्दस्त हिट होते हैं। दिल वाले दुल्हनिया ले जायेंगे फिल्म से शाहरुख खान ने यश चोपड़ा कैम्प में जो सेंध मारी वो अभी तक जारी है। इसके अलावा शाहरुख ने तड़क भड़क व कई सितारों वाली फिल्में बनाने वाले करण जौहर का साथ भी पा लिया। करण जौहर के साथ भी शाहरुख खान का साथ अभी जारी है।

शाहरुख खान को अपनी कमियों का पूरा अहसास है। शाहरुख को पता है कि उनके पास सनी देयोल और अक्षय कुमार की तरह दिखाने लायक बॉडी नहीं है। इसलिये शाहरुख खान एक्शन फिल्मों में अपने आप को अनफिट पाते है और रोमानी फिल्मों में ही ज्यादा ध्यान देते हैं। रोमनी फिल्मों में हीरो को एक्शम फिल्मों के नायक की तरह बदन नहीं दिखाना होता है, जो कि शाहरुख खान की कमजोरी है। इसलिये शाहरुख खान हमेशा अच्छे डिजायनर कपड़े पहने हुये एन आर आई के रोल में ही दिखाई देते हैं। गांव के निवासी का रोल या गरीब का रोल शाहरुख खान नहीं करते हैं। डिजायनर छवि महिलाओं और बच्चों में खासी लोकप्रिय है।

शाहरुख खान की एक और विशेषता इनका समय पर सोच समझ कर अपने आप को पेश करना है। इसीलिये कौन बनेगा करोड़पति 3 मे शाहरुख ने एंकर का काम किया और बखूबी किया। जब शाहरुख खान की कोई फिल्म प्रद्रशित होने वाली होती है तब वो अचानक ही टीवी पर साक्षात्कार देते हुये नजर आने लगते हैं। यह कोई खेल प्रेम नहीं है कि शाहरुख खान ट्वेंटी-20 के विश्ल कप के फाइनल में पैवेलियन में नजर आ रहे थे। शाहरुख खान सोच समझ कर कदम बढ़ाते हैं।

अब इस बात को अक्षय कुमार के ऊपर रख कर देखते हैं। अक्षय कुमार के वो सब कुछ है जो कि बॉलीवुड के नायक में होना चाहिये। उंचा कद, बलिष्ठ शरीर, कामचलाऊ ठीक-ठाक एक्टिंग, जबर्दस्त एक्शन में महारत इत्यादि। अक्षय की भी शाहरुख खान की तरह शुरूआत अच्छी रही। लेकिन अक्षय कुमार ने काफी सारी उल्टी सीधी व छोटे निर्माताओं की फिल्में की जिसकी वजह से शाहरुख खान से काफी पीछे रह गये। अक्षय के पास हाल फिलहाल मे केवल एक बड़ा नाम प्रियदर्शन का है जिसकी फिल्मों में अक्षय कॉमेडी अच्छी कर रहे हैं।

सारांश यह है कि शाहरुख खान ने सुपर स्टार का दर्जा प्राप्त करने के लिये मेहनत करने के साथ-साथ सूझबूझ के साथ अपने दांव चले हैं जो कि अधिकांशत: सफल रहे हैं।

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