Thursday, 13 December, 2007

शादी में जेब पर ध्यान देती हैं लड़कियां

अभी तक जो बात आम लोगों को मालूम थी, उस पर अब एक शोध ने भी मोहर लगा दी है। शोध के अनुसार इश्क करने के लिए लड़कियां भले ही खूबसूरत और बांके छोरों को पसंद करती हों लेकिन जब बात हमसफर चुनने की आती है तो वे शक्ल-सूरत के बजाय जेब पर ज्यादा ध्यान देती हैं।

अंतर्राष्ट्रीय शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि पुरुष को यदि शादी रचानी है तो इसमें उसकी सूरत से ज्यादा दौलत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। डेली टेलीग्राफ में बुधवार को प्रकाशित रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है। हालांकि इससे पहले भी कई शोधों में यही बताया गया है कि महिलाएं केवल शक्ल नहीं बल्कि पुरुष के ऊंचे रहन-सहन, ताकत और दौलत की बदौलत उसकी ओर खिंची चली आती हैं। शोधकर्ताओं ने 20 हजार से अधिक अमेरिकी पुरुषों तथा 1910 में एकत्र किए गए ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर यह नतीजा निकाला है। शोध में बताया गया है कि प्रथम विश्व युद्ध के समय जब पुरुषों की कमी हो गई थी तो लड़कियों ने गरीब जीवनसाथी भी चुने। लेकिन पुरुषों की उपलब्धता बढ़ने पर वे सतर्क हो गई। इससे आर्थिक रूप से कमजोर पुरुषों की विवाह की संभावनाओं में नाटकीय ढंग से कमी आई। रिपोर्ट बताती है कि बाजार किस तरह व्यक्तिगत निर्णयों को प्रभावित करता है। यदि पुरुष बड़ी संख्या में उपलब्ध हैं तो इससे उनका बाजार मूल्य प्रभावित होगा तथा महिलाओं के लिए विकल्प बढ़ जाएंगे।

न्यूकैसेल यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता थामस पोलेट कहते हैं कि जब महिलाओं और पुरुषों की उपलब्धता समान होती है तो विवाहित लोगों का सामाजिक-आर्थिक स्तर अविवाहित पुरुषों के मुकाबले थोड़ा ऊंचा होगा।

भारत के संदर्भ में यह बात पहले से ही प्रमाणित है। यहां लड़कियां शादी के लिये खूबसूरत राजकुमारों के ख्वाब देखा करती हैं। मेरी कितनी ही सहेलियों के घर वालें ने उनकी इच्छा के अनुरुप उंची पदवी वाले लड़कों से उनकी शादी के कितने ही प्रयास किये। लडकियां अपने होने वाले वर को पैसे वाला और रुतबे वाला देखना चाहती हैं। कई बार तो झूठे ही बखान देती हैं कि उनके होने वाले वर के पास कितना पैसा है। अब राजकुमार तो रहे नहीं इसलिये अब बड़े अधिकारी, व्यापारी, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के एक्जीक्यूटिव आदि पसंद में अव्वल हैं।

1 टिप्पणी:

Mired Mirage said...

स्त्री वैवाहिक संस्था व बच्चों के जन्म व लालन पालन में बहुत कुछ दाँव पर लगाती है । प्राणी जगत में भी मादा सदा सबसे बेहतर का चुनाव करती है । यह प्रकृति का नियम है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ हमसे बेहतर हो सकें । अब जबकि स्त्री स्वयं कमाने लगी है तो शायद पुरुष की जेब का महत्व कम हो जायेगा । उसका स्थान कई अन्य गुण जैसे परिवार के काम में हाथ बंटाना आदि शामिल हो जायेंगे ।
घुघूती बासूती

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