प्रमुख उद्योग चैंबर एसोचैम के एक ताजा सर्वे के मुताबिक लंबे समय से सिर्फ महानगरों में ही चलने वाली आर्थिक विकास की हवा अब देश के छोटे शहरों में भी पहुंचने लगी है। इससे बेहतर भविष्य की तलाश में महानगरों की तरफ रुख करने वाले युवा अब अपने शहरों में ही रहने को तरजीह दे रहे हैं। हों भी क्यों न, आखिर इन शहरों में नौकरियों के अवसर जो बढ़ रहे हैं। एसोचैम के इको पल्स सर्वे के मुताबिक पिछले चार महीनों के दौरान देश भर में कुल नौकरियों का 20 प्रतिशत हिस्सा दूसरी श्रेणी के 15 शहरों की झोली में गया। सर्वे के अनुसार चंडीगढ़, वड़ोदरा, जयपुर, पुणे, आगरा और अहमदाबाद भी अब ऐसे शहरों में शुमार किए जाते हैं जहां कंपनियां आईटी शिक्षा, वित्तीय सेवाओं तथा रीयल एस्टेट का काम बड़े पैमाने पर कर रही हैं। सर्वे में अगस्त-नवंबर 2007 के दौरान रोजगार के अवसरों के रुख पर अध्ययन किया गया। इसके लिए पिछले चार महीनों के दौरान विभिन्न अखबारों और नौकरी पोर्टलों पर एक हजार कंपनियों द्वारा चार हजार 400 रिक्तियों के लिए दिए गए विज्ञापनों को आधार बनाया गया। इसमें दूसरे दर्जे का होने के बावजूद नौकरी के अवसर प्रदान करने वाले शीर्ष 10 शहरों की सूची में चंडीगढ़ को पांचवां स्थान हासिल हुआ। नौकरी प्रदान करने के मामले में इसका स्थान महानगर कोलकाता और हैदराबाद से बहुत ऊपर है। इस मामले में शीर्ष चार शहरों में दिल्ली, मुंबई, चेन्नई व बेंगलूर शामिल हैं। सूची में चंडीगढ़ के बाद वड़ोदरा, जयपुर, पुणे, आगरा और अहमदाबाद जैसे छोटे शहरों ने बाजी मारी। इनके बाद लुधियाना, भोपाल और विजयवाड़ा को स्थान हासिल हुआ। बाद के पांच शहरों में कोझीकोड, सूरत, रांची, अमृतसर और लखनऊ का स्थान है। नौकरी के लिए रिक्त स्थानों के मामले में दूसरी श्रेणी के शहरों में चंडीगढ़ सबसे आगे है। इस वर्ग की कुल नौकरियों में उसका योगदान 12 फीसदी है। 7.5 प्रतिशत योगदान के साथ वड़ोदरा दूसरे स्थान पर है। यह रिपोर्ट आप एसोचैम की साइट पर यहां पढ़ सकते हैं।









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