Sunday, 25 November, 2007

डोला बनर्जी तीरंदाजी की विश्व चैंपियन बनीं

खेलों की दुनिया में भारत का अच्छा प्रदर्शन जारी है। फुटबाल, हॉकी, क्रिकेट, शतरंज के बाद अब बारी है तीरंदाजी की। भारत की डोला बनर्जी महिला तीरंदाजी की विश्व चैंपियन बन गई हैं।

देश की शीर्ष तीरंदाज डोला बनर्जी ने दुबई में विश्व कप फाइनल में दक्षिण कोरिया की चोई यून यंग को महिला रिकर्व स्पर्धा में 110-109 से हराकर विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल कर लिया। डोला को 20 हजार डालर की पुरस्कार राशि मिली।

कोरियाई चोई की फाइनल में अच्छी शुरुआत रही और पहले राउंड में 9, 9, 10 के स्कोर के साथ 28 अंक जुटाए, जबकि डोला का स्कोर 10, 8, 9 के साथ 27 रहा। कोरियाई तीरंदाज ने अगले राउंड में आठ के साथ शुरुआत की व फिर दो टेन कर बढ़त कायम रखी तो डोला ने दो नौ और एक टेन स्कोर किया। डोला अभी 55-56 से पीछे थीं। दोनों में जोरदार मुकाबला चलता रहा और दोनों ने अगले राउंड में 10, 9, 10 का स्कोर किया, जिसके बाद भी बढ़त कोरियाई तीरंदाज (85-84) के पक्ष में रही। इस नाजुक दौर में डोला ने आठ स्कोर किया तो लगा कि उम्मीदें खत्म हो गईं, मगर चोई के सात के स्कोर ने सब बराबर कर दिया। अगला स्कोर नौ-नौ था व बराबरी जारी थी। डोला ने अंतिम ऐरो में आठ का स्कोर किया। कोरियाई तीरंदाज को खिताब जीतने के लिए नौ स्कोर करना था, पर वह चूक गई और डोला विश्व चैंपियन बन गई।

इस उपलब्धि पर डोला ने कहा कि मेरे लिए यह विशेष क्षण है। मैं यह जीत अपने देश को समर्पित करती हूं।

महिला तीरंदाजी के इस विश्व कप फाइनल में उन चार शीर्ष तीरंदाजों को ही आमंत्रित किया जाता है, जिन्होंने वर्ष में चार विश्व कप में सर्वश्रेष्ठ स्कोर दिया हो। ये चार विश्व कप कोरिया, इटली, तुर्की व ब्रिटेन में हुए थे। चारों विश्व कप में उम्दा प्रदर्शन के कारण डोला को दुबई में फाइनल खेलने के लिए बुलाया गया था, जहां उन्होंने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ तीरंदाजों के बीच विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। इस टूर्नामेंट में पुरुषों और महिलाओं के कंपाउंड और रिकर्व वर्ग में कुल 16 तीरंदाजों ने भाग लिया। चारों वर्ग में चोटी के चार-चार तीरंदाज थे।

डोला का यह प्रदर्शन भारत के खेलों की दुनिया की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। देखना यह है कि भारत की जनता और सरकार क्रिकेट की तरह तीरंदाजी का विश्व चैंपियन का किस तरह स्वागत करते हैं। क्या इस प्रकार के खेलों को भी क्रिकेट की तरह सम्मान मिलेगा? बहरहाल खेलों के लिये जिस प्रकार के हालात और सुविधायें देश में हैं उस को देखते हुये डोला की यह उपलब्धि बधाई की पात्र है। शाबाश डोला!!

2 टिप्पणी:

Sanjeeva Tiwari said...

डोला को बधाई एवं आपको इसे यहां पर प्रकाशित करने के लिए धन्‍यवाद ।

हमारे देश के एक और धुरंधर तीरंदाज शव्‍दभेदी बाण साधक के संबंध में हमने अपने चिट्ठे पर लिख था, डोला जी को उनसे अवश्‍य मिलवायें ।

www.aarambha.blogspot.com

anuradha srivastav said...

डोला बधाई की पात्र है ।उनके उज्जवल भविष्य की कामना है।आशा है उन्हें यथोचित सम्मान-सत्कार मिलेगा।

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