Thursday, 30 August, 2007

साइबरस्लैकिंग - कामचोरी का नया फंडा

एक नई किताब में किए गए खुलासे की मानें तो आजकल कर्मचारी आफिस टाइम का ज्यादातर समय इंटरनेट पर सर्फग में गुजारते हैं, जो कामचोरी का नया फंडा बनकर उभर रहा है। आप किसी भी बड़ी कंपनी में चले जाइए। अपनी सीट पर बैठे कुछ लोग आपको ऐसे जरूर मिल जाएंगे, जिन्हें देखकर लगेगा कि वह कंप्यूटर पर बहुत महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं। अब जरा चुपचाप उनके करीब जाकर देखिए तो पता चल जाएगा कि वह महाशय तो इंटरनेट में सर्फिग या चैटिंग में मस्त हैं।

कुल मिलाकर इंटरनेट कामचोरी का नया फंडा बन गया है। ऐसा नजारा दुनियाभर के लगभग सभी बड़े कार्यालयों में देखने को मिल जाएगा। पूरी दुनिया में किए गए सर्वेक्षण के मुताबिक कर्मचारी अपने आफिस टाइम का बीस फीसदी हिस्सा व्यक्तिगत गतिविधियों में जाया करते हैं। वक्त बर्बाद करने का उनका पसंदीदा साथी है - इंटरनेट। तीन साल पहले लिखी गई एक चर्चित किताब 'द इंटरनेट इन द वर्कप्लेस : हाउ न्यू टेक्नोलाजी इज ट्रांसफारमिंग वर्क' की लेखिका पैट्रेसिया वालेस का कहना है कि ज्यादा मेहनत से जी चुराना कुछ कर्मचारियों की आदत होती है। बाल्टीमोर में जान हापकिंस यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर पैट्रेसिया ने कहा कि कर्मचारियों की डेस्क पर पूरी दुनिया का 'गेटवे' यानी इंटरनेट की सुविधा एक अच्छी बात है। कुछ लोग इसका फायदा उठाते हैं तो कुछ सिर्फ चैटिंग या गेम्स में वक्त बर्बाद करते हैं।

साइबरव‌र्ल्ड के दीवाने ऐसे कर्मचारी ई-मेल करने के भी बेहद शौकीन होते हैं और अपनी डेस्क से भेजा गया उनका हर तीसरा मैसेज व्यक्तिगत होता है। कुछ कर्मचारियों को आनलाइन शापिंग का जुनून होता है जबकि बहुत से आरकुट या माईस्पेस जैसी सोशल नेटवर्किग साइट्स में नए-नए दोस्त खोजते रहते हैं। कुछ कंपनियों ने कर्मचारियों की इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के काफी प्रयास किए मगर नतीजा सिफर रहा। कुछ कंपनियों ने कंप्यूटर से इंटरनेट हटवा दिए, लेकिन साइबर दीवानों ने अपने सेलफोन से इंटरनेट कनेक्टीविटी ले ली।

अमेरिका का तो हाल यह है कि वहां हर दस में से छह कर्मचारी आफिस में समय बर्बाद करते हैं। करीब 34 फीसदी कर्मचारियों ने स्वीकार किया है कि वह व्यक्तिगत कामों के लिए आफिस में इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने इसकी वजह बताई कि ऐसा वह काम के बोझ को कम करने या बोरियत दूर करने के लिए करते हैं। कुछ कम वेतन की खुन्नस में ऐसा करते हैं जबकि कुछ कर्मचारियों पर काम का दबाव बहुत कम होता है। इतना ही नहीं इस्त्राइल और अमेरिका में तो बीस फीसदी लोग आफिस में ही सेक्स चैटिंग करते हैं। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि आफिस में इंटरनेट के प्राइवेट इस्तेमाल से कंपनी का नुकसान नहीं बल्कि फायदा होता है। इस के जरिए कर्मचारी थोड़ा सा मनोरंजन कर लेता है और आराम के बाद उसकी काम करने की क्षमता बढ़ जाती है। कुछ कर्मचारी तो इंटरनेट सर्फिग के मारे लंच ब्रेक भी नहीं लेते हैं।

और अपने देश में क्या हाल है? मैं तो जब भी साइबर कैफे जाती हूं तो अधिकांश लोगों को ओरकुट पर विचरण करते हुये या फिर याहू या एसएसएन पर चैटिंग करते हुये ही देखती हूं। थोड़े बहुत अन्य लोग ई-मेल पढ़ते हुये व नौकरी ढूढते हुये नजर आते हैं। भारत के सरकारी आफिसों में तो वैसे ही काम नहीं है, कामचोरी तो पहले से ही है इसलिये इंटरनेट का क्या असर होगा? प्राइवेट कार्यालयों मे उपर वाली बात शायद लागू होती हो।

1 टिप्पणी:

Udan Tashtari said...

सब अच्छाई के साथ साथ बुराई भी हमेशा जुगलबंदी करती है. इस तरह की आदतों और दुरुपयोग पर अंकुश लगाये जा रहे हैं.

मैं अपने बैंक की इस व्यबस्था को देखता हूँ. हमने सारी पब्लिक ईमेल और उल्टी सीधी वेबसाईट के एक्सेस बैन की हुई है. साथ ही एक कॉमन एरिया के कम्प्यूटर्स पर जाकर आप पब्लिक साईट्स देख सकते हैं. जैसे कि लंच रुम आदि.

इस तरह की व्यवस्था से काफी अंतर पड़ा है.

ब्लॉग स्पॉट अभी बैन नहीं किया है. :) वरना तो हम ही अटक जायें. हा हा!!!

मजाक कर रहा हूँ. एडमिनिस्ट्रेटर्स के लिये वैसे भी कुछ भी बैन कहाँ होता है. दूसरों को रोकना और समझाना सरल होता है न!!! :)

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