आधुनिक समय में चिकित्सा विज्ञान ने काफी तरक्की कर ली है। कई असम्भव सी दिखने वाली परेशानी दूर करने में सफलता मिल रही है। चिकित्सा विज्ञान के चमत्कार से देश में संभवत: पहली बार 56 वर्षीय एक महिला ने तमिलनाडु के अस्पताल में सोमवार को जुड़वां बच्चे को जन्म दिया है, जबकि बढ़ती उम्र के कारण इस उम्रदराज मां की माहवारी भी बंद हो चुकी थी।
चिकित्सा विज्ञान की नई विधि से कर्नाटक की वृंदा नाम की एक महिला का शादी के 28 वर्ष बाद मां बनने का सपना साकार हो सका जबकि 11 वर्ष पहले उनकी माहवारी भी बंद हो चुकी थी। यह कमाल कर दिखाने वाली चेन्नई की स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. जयारानी कामकाज और उनके पति कामराज ने दावा किया है कि यह देश में अपनी तरह की पहली ऐसी उपलब्धि है। करीब एक घंटे के आपरेशन के बाद जन्म लेने वाले बच्चे और मां तीनों स्वस्थ हैं। शादी के 28 वर्ष बाद भी मां न बनने से पूरी तरह निराश वृंदा ने चेन्नई के आकाश फर्टिलिटी सेंटर से पिछले वर्ष नवंबर में संपर्क किया। मेडिकल परीक्षणों से पता लगा कि महिला की बच्चेदानी ठीक है और 57 वर्षीय उनके पति अलागप्पन के शुक्राणु की मात्रा कम थी। डायबिटीज और ब्लड प्रेशर की शिकायत के बावजूद भी वृन्दा ने आकाश और रिषिकेश नाम के दो स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया है। वृन्दा के अनुसार करीब तीस साल तक बिना बच्चों के जिन्दगी गुजारने के बाद यह दिन उसके लिये खुशियां लेकर आया है। वृन्दा ने हाल ही में सार्वजनिक बैंक से सेवानिवृति ली है।
माहवारी बंद होने के कारण किसी अन्य से अंडाणु लेकर इंट्रा साइट्रोप्लास्मिक स्पर्म इंजेक्शन प्रक्रिया अपनाई गई और इस तकनीक के इस्तेमाल से वृंदा उसी वर्ष गर्भवती हो गई। डा. जयारानी ने बताया कि जुलाई 2006 में 59 वर्षीया अमेरिकी महिला लारेन कोहेन ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था और वह सर्वाधिक उम्र में मां बनने वाली दुनिया की पहली महिला बन गई है।









1 टिप्पणी:
तीन दिन के अवकाश (विवाह की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में) एवं कम्प्यूटर पर वायरस के अटैक के कारण टिप्पणी नहीं कर पाने का क्षमापार्थी हूँ. मगर आपको पढ़ रहा हूँ. अच्छा लग रहा है.
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